नई दिल्ली।

दिल्ली में साइबर ठगी का तरीका अब और खतरनाक होता जा रहा है। अपराधी खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक रूप से तोड़ रहे हैं और “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर उन्हें दिनों तक डर में जीने को मजबूर कर रहे हैं। दक्षिण दिल्ली से सामने आए ताजा मामलों ने राजधानी में बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन दिन तक फोन पर कैद, फिर उड़ गई जीवनभर की कमाई
ग्रेटर कैलाश इलाके की 70 वर्षीय महिला को साइबर ठगों ने यह कहकर कॉल किया कि उनका नाम एक गंभीर केस में आ गया है। ठगों ने दावा किया कि महिला की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और किसी से भी संपर्क करने पर तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी।
लगातार कॉल और वीडियो कॉल के जरिए महिला पर दबाव बनाया गया। करीब तीन दिन तक डर और तनाव में रखने के बाद अलग-अलग बैंक खातों में लगभग 7 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। बाद में परिजनों को शक हुआ, तब जाकर पुलिस तक मामला पहुंचा। स्पेशल सेल की साइबर यूनिट अब पैसों की ट्रांजैक्शन चेन और गिरोह की तलाश में जुटी है।
इसी इलाके में डॉक्टर दंपती भी बन चुके हैं शिकार
इससे पहले ग्रेटर कैलाश में ही अमेरिका से लौटे एक डॉक्टर दंपती के साथ भी इसी तरह की ठगी सामने आ चुकी है। आरोप है कि ठगों ने उन्हें फर्जी अदालती मामलों और एफआईआर की धमकी देकर करीब दो हफ्ते तक मानसिक कैद में रखा और अलग-अलग खातों में करीब 14 करोड़ रुपये डलवा लिए।
जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों मामलों में इस्तेमाल किया गया तरीका एक जैसा है, जिससे संगठित साइबर गिरोह की भूमिका की आशंका मजबूत हो रही है।
मुनिरका केस की जांच अब CBI के हाथ
डिजिटल अरेस्ट से जुड़ा एक और मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो के पास पहुंच गया है। मुनिरका इलाके की 76 वर्षीय विधवा पेंशनभोगी से 1.64 करोड़ रुपये की ठगी के केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। इस केस में फर्जी सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों का इस्तेमाल कर महिला को डराया गया था।
बुजुर्गों के लिए अलर्ट जारी
दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे नहीं मांगती। ऐसी किसी भी कॉल की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने से संपर्क करें।
