February 6, 2026

IMT, Desk

टाटा समूह 2023-24 में 13 लाख 85 हजार करोड़ रुपये के राजस्व के साथ दुनिया के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक है। भारत के रतन कहे जाने वाले दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अरबपतियों में शामिल होने के बावजूद अपनी सादगी से हर किसी का दिल जीत लेते थे। वह उन शख्सियतों में शुमार थे, जिनका हर कोई सम्मान करता था। कई मौकों पर उन्होंने गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद कर भारतीयों को गर्व महसूस कराया।

टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का बुधवार निधन हो गया। रतन टाटा वह शख्स थे जिन्होंने बड़े अधिग्रहणों के साथ एक स्थिर और विशाल भारतीय समूह को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। टाटा समूह ने बुधवार देर रात एक बयान में उनके निधन की जानकारी दी। रतन टाटा 86 वर्ष के थे। मुंबई के एक अस्पताल की आईसीयू में उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने 20 वर्षों से अधिक समय तक चेयरमैन के तौर पर टाटा समूह का नेतृत्व किया। रिटायरमेंट के बाद भी समूह के संचालन में उनका अहम योगदान बना रहा। टाटा समूह में कितनी कंपनियां है? वे कितने क्षेत्रों काम करती हैं? देश में स्टार्टअप्स के विकास में रतन टाटा का क्या योगदान रहा? ये सारी बातें हम आगे जानेंगे, उससे पहले रतन टाटा के कारोबारी सफर पर एक नजर डालते हैं।

एक असाधारण नेतृत्वकर्ता थे रतन टाटा: टाटा समूह

रतन टाटा के निधन के बाद टाटा समूह ने कहा, “हम बहुत बड़ी क्षति के साथ रतन नवल टाटा को विदाई दे रहे हैं, वे वास्तव में एक असाधारण नेता थे, जिनके अतुलनीय योगदान ने न केवल टाटा समूह को बल्कि हमारे राष्ट्र के ढांचे को भी आकार दिया।” भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “रतन टाटा एक दूरदर्शी कारोबारी नेता, एक दयालु आत्मा और एक असाधारण इंसान थे। उनके निधन से मुझे बहुत दुख हुआ। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के साथ हैं।”

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अमेरिका से वास्तुकला की डिग्री लेकर लौटे और 1962 में शुरू किया समूह में काम

अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद रतन टाटा भारत लौटे और 1962 में उस समूह के लिए काम करना शुरू किया जिसकी स्थापना उनके परदादा ने लगभग सौ साल पहले किया था। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने टाटा समूह की कई टाटा कंपनियों में काम किया, जिनमें टेल्को (अब टाटा मोटर्स लिमिटेड) और टाटा स्टील लिमिटेड जैसी कंपनियों शामिल हैं। आगे चलकर उन्होंने टाटा की एक अन्य इकाई नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में घाटे को खत्म करके बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई जिससे उनकी अलग पहचान बनी।

1991 में जेआरडी टाटा के रिटायर होने के बाद संभाली कमान

1991 में, जब रतन टाटा के चाचा जेआरडी टाटा ने पद छोड़ा, तब उन्हें  समूह की कमान सौंपी गई। उन्होंने 1991 से दिसंबर 2012 तक नमक से लेकर सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी ‘टाटा संस’ के अध्यक्ष के रूप में टाटा ग्रुप का नेतृत्व किया। यह कमान उनके हाथों में उस समय सौंपी गई जब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी सुधारों की शुरुआत की थी। उसी दौरान सरकार ने अर्थव्यवस्था को वैश्विक निवेश के लिए खोला जिससे और देश में बड़े विकास का दौर शुरू हुआ। अपने शुरुआती दिनों में रतन टाटा समूह की कई कंपनियों में लंबे समय से काबिज कुछ दिग्गजों की शक्तियों पर लगाम लगाने की कोशिश की। कंपनियों में सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित की गई और युवा लोगों को वरिष्ठ पदों पर पदोन्नत किया गया। इस कंपनियों पर उनका नियंत्रण बढ़ता गया।

रतन टाटा दुनिया के बड़े ब्रांड्स को टाटा की छतरी के नीचे लाए

उन्होंने दूरसंचार कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज  की स्थापना की। 1996 में उन्होंने आईटी फर्म टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को अपने अधीन कर लिया। समूह की आमदनी में बड़ा हिस्सा देने वाली इस कंपनी को 2004 में सार्वजनिक किया गया। रतन टाटा के नेतृत्व में समुचित विकास के लिए समूह ने यह निश्चय किया कि उसे भारतीय सीमाओं से परे भी देखना होगा। अपनी कारोबारी यात्रा पर 2013 में स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस को दिए एक साक्षात्कार में टाटा ने कहा था, “यह विकास की खोज थी और हमें आधारभूत नियमों को बदलना था, ताकि हम अधिग्रहण के माध्यम से खुद को आगे ले जा सके। यह हमने पहले कभी नहीं किया था।” समूह ने 2000 में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली को 432 मिलियन डॉलर में और 2007 में एंग्लो-डच स्टील निर्माता कोरस को 13 बिलियन डॉलर में खरीदा था। यह उस समय किसी भारतीय कंपनी की ओर से की गई विदेशी कंपनी का सबसे बड़ा अधिग्रहण था। इसके बाद टाटा मोटर्स ने फोर्ड मोटर कंपनी (एफएन) से ब्रिटिश लग्जरी ऑटो ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। यह सौदा 2008 में 2.3 बिलियन डॉलर में हुआ।

भारत में डिजाइन और निर्मित सबसे पहली और सबसे सस्ती कार लाए रतन टाटा

टाटा मोटर्स में उनकी पसंदीदा परियोजनाओं में इंडिका (भारत में डिजाइन और निर्मित पहली कार) और नैनो (जिसे दुनिया की सबसे सस्ती कार बताया गया) शामिल थी। रतन टाटा ने दोनों मॉडलों के लिए शुरुआती स्केच तैयार किए थे। इंडिका व्यावसायिक रूप से सफल रही। हालांकि, नैनो, जिसकी कीमत मात्र 100,000 रुपये (लगभग 1,200 डॉलर) थी और जो भारत के आम लोगों के लिए एक किफायती कार बनाने के रतन टाटा के सपने की परिणति थी, को सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और गड़बड़ मार्केटिंग के कारण नुकसान उठाना पड़ा। लॉन्च होने के एक दशक बाद ही इसे बंद कर दिया गया। रतन टाटा एक लाइसेंसधारी पायलट थे, जो कभी-कभी कंपनी का विमान भी उड़ाते थे। उन्होंने कभी विवाह नहीं किया और वे अपने शांत आचरण, अपेक्षाकृत साधारण जीवनशैली और परोपकारी कार्यों के लिए जाने गए। समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की लगभग दो-तिहाई शेयर पूंजी परोपकारी ट्रस्टों के पास है। 

जिसे उत्तराधिकारी चुना उसी से हुआ विवाद

टाटा में उनका नेतृत्व विवादों से अछूता नहीं रहा। उन्होंने जिस साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के नेतृत्व के लिए अपना उत्तराधिकारी चुना उसी से उनके विवाद की खबरें आई। सबसे उल्लेखनीय विवाद तब हुआ जब कंपनी ने अरबपति शापूरजी पालोनजी परिवार के वंशज साइरस मिस्त्री को 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। टाटा समूह ने कहा कि मिस्त्री खराब प्रदर्शन करने वाले व्यवसायों की स्थिति सुधारने में असफल रहे हैं, जबकि मिस्त्री ने रतन टाटा, जो समूह के मानद चेयरमैन थे, पर हस्तक्षेप करने और समूह में एक वैकल्पिक सत्ता केंद्र बनाने का आरोप लगाया। 

Ratan Tata Legacy His Global Impact on Tata Group Contributions to Startups Business Journey

नमक से सेमीकंडक्टर तक बनाने के कारोबार में टाटा समूह

टाटा ग्रुप (Tata Group companies) कई दिग्गज कंपनियों का संचालन करती है। टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनियों में एयर इंडिया, टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा नमक, टाटा चाय, जगुआर लैंड रोवर, टाइटन, फास्ट्रैक, तनिष्क, स्टारबक्स, वोल्टास, जारा, वेस्टसाइड, कल्टफिट, टाटा एआईजी, टाटा एआईए लाइफ, टाटा प्ले, टाटा वनएमजी और टाटा कैपिटल ब्रांड्स शामिल हैं। टाटा समूह की कंपनियों ने हाल ही में देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण में भी कदम रखा है। टाटा ग्रुप के मार्केट कैप की ही बात करें, तो यह पाकिस्तान की जीडीपी से भी ज्यादा है। पाकिस्तान की जीडीपी के इस साल के आखिर तक 347 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। जबकि टाटा ग्रुप का मार्केट कैप जुलाई 2024 में ही 400 अरब डॉलर को पार कर गया था। टाटा ग्रुप देश का पहला ऐसा कारोबारी ग्रुप है, जिसकी कंबाइंड वैल्यूएशन 400 अरब डॉलर को पार कर गई है।

ग्रुप की 26 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड

ग्रुप की 26 कंपनियां स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट है। कंपनी नमक बनाने से एयरलाइन और सेमीकंडक्टर चिप बनाने तक के कारोबार से जुड़ी है। टाटा समूह की वेबसाइट के अनुसार 1868 में जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित टाटा समूह एक वैश्विक उद्यम है, जिसका मुख्यालय भारत में है और जिसमें दस क्षेत्रों की 30 कंपनियां शामिल हैं। यह समूह छह महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों में काम करता है। टाटा संस टाटा कंपनियों की प्रमुख निवेश होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर है। टाटा संस की इक्विटी शेयर पूंजी का 66 प्रतिशत हिस्सा परोपकारी ट्रस्टों के पास है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका सृजन और कला व संस्कृतिक विकास का समर्थन करते हैं। 2023-24 में टाटा कंपनियों का कुल राजस्व 165 बिलियन डॉलर से ज़्यादा था। प्रत्येक टाटा कंपनी या उद्यम अपने स्वयं के निदेशक मंडल के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण के तहत स्वतंत्र रूप से काम करता है। 31 मार्च, 2024 तक 365 बिलियन डॉलर से अधिक के संयुक्त बाजार पूंजीकरण के साथ टाटा के पास 26 सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध उद्यम हैं।

Ratan Tata Legacy His Global Impact on Tata Group Contributions to Startups Business Journey

पियानो बजाते रतन टाटा और किशोरावस्था के दौरान भाई जिमी के साथ 

10 लाख से ज्यादा लोगों को टाटा समूह में मिल रहा रोजगार

टाटा ग्रुप बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दे रहा है। वित्त वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में टाटा ग्रुप की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 10,28,000 थी। टाटा ग्रुप की टीसीएस में ही करीब 6,15,000 लोग काम करते हैं। टीसीएस कर्मचारियों के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है। उनके नेतृत्व में 21 सालों में, टाटा समूह का कारोबार 40 गुना से अधिक और मुनाफा 50 गुना से अधिक बढ़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक,  रतन टाटा की नेट वर्थ 3800 करोड़ रुपये थी।

पेटीएम, ओला इलेक्ट्रिक जैसे स्टार्टअप में भी टाटा का निवेश

टाटा समूह से हटने के बाद, रतन टाटा भारतीय स्टार्टअप्स में एक प्रमुख निवेशक के रूप में भी जाने गए। उन्होंने डिजिटल भुगतान फर्म पेटीएम सहित कई कंपनियों जैसे ओला इलेक्ट्रिक और घरेलू एवं सौंदर्य सेवा प्रदाता अर्बन कंपनी जैसे स्टार्टअप्स में निवेश किया। उन्होंने स्नैपडील, टीबॉक्स और कैशकरो डॉट कॉम की भी मदद की। रतन टाटा को अपने जीवनकाल में अनेक पुरस्कारों के अलावा, व्यापार और उद्योग में असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए 2008 में भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण भी दिया गया।

कैसे होता है टाटा संस और उसके ट्रस्ट्स का संचालन?

टाटा समूह में पांच प्रमुख ट्रस्ट हैं। इनकी टाटा सन्स में 66% हिस्सेदारी है, और टाटा संस का टाटा ग्रुप के पूरे कॉरपोरेट साम्राज्य पर नियंत्रण है। टाटा संस समूह की होल्डिंग कंपनी है। ये पांच ट्रस्ट मुख्य रूप से परोपकारी ट्रस्ट हैं। इनमें से दो सबसे बड़े सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट हैं। इन सभी के चेयरमैन रतन टाटा थे। इनमें से अधिकांश के वाइस चेयरमैन आईएएस अधिकारी विजय सिंह हैं। वे मध्य प्रदेश काडर के 1970 बैच के अधिकारी हैं। 

टाटा संस को चलाने वाले ट्रस्ट में किनकी भूमिका

• सर दोराबजी टाटा ट्रस्टःट्रस्टीः विजय सिंह, वेनु श्रीनिवासन, माया एन टाटा, नेविल एन टाटा और तुषाद दुबाश। 
• सर रतन टाटा ट्रस्टःट्रस्टीः विजय सिंह, वेनु श्रीनिवासन, जेएन टाटा, एनएन टाटा, जहांगीर एचसी टाटा, मेहली मिस्त्री और डेरियस खंबाटा।
• टाटा एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट ट्रस्टःट्रस्टीः जेएन मिस्त्री, विजय सिंह, वेनु श्रीनिवासन । 
 हीराबाई जेएन टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशनःट्रस्टीः विजय, वेनु श्रीनिवासन, जेएन टाटा, एनएन टाटा, जहांगीर एचसी टाटा, मेहली मिस्त्री, डेरियस खंबाटा। 
• सार्वजनिक सेवा ट्रस्टःट्रस्टीः जेएन टाटा, जेएन मिस्त्री, लिया एन टाटा, माया एन टाटा।

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