
मणिपुर में नई सरकार के गठन के साथ ही शांति की उम्मीदें टिक नहीं सकीं। युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में सरकार बनने के महज एक दिन बाद ही राज्य एक बार फिर अशांति की चपेट में आ गया। पहाड़ी जिलों में कुकी-जो समुदाय से जुड़े संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है, जिससे हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं।
शपथ समारोह के दौरान बढ़ा तनाव
चुराचांदपुर में डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ से जुड़े कार्यक्रम के दौरान माहौल उस वक्त बिगड़ गया, जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हो गया। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद इलाके में डर और तनाव का माहौल फैल गया।
कुकी संगठनों का बंद, विधायकों को सख्त संदेश
कुकी-जो समुदाय से जुड़े संगठनों ने सरकार गठन के विरोध में पूरी तरह बंद का ऐलान किया। इसके साथ ही समुदाय के विधायकों को चेतावनी दी गई कि वे मौजूदा सरकार के साथ किसी भी तरह की भागीदारी से दूरी बनाए रखें।
संयुक्त संगठन जॉइंट फ्रंट-7 ने कुकी-जो बहुल इलाकों में 12 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिसका असर कई जिलों में दिखा।
विरोध की जड़ क्या है?
बताया जा रहा है कि नई सरकार में नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने और कुछ विधायकों के समर्थन को लेकर कुकी-जो समुदाय के भीतर गहरी नाराजगी है। समुदाय के एक बड़े वर्ग का मानना है कि मौजूदा सत्ता व्यवस्था उनके हितों के अनुरूप नहीं है।
चुराचांदपुर और तुइबोंग में हालात नाजुक
विरोध प्रदर्शन के दौरान चुराचांदपुर और तुइबोंग जैसे इलाकों में हालात तेजी से बिगड़े। कुछ स्थानों से गोली चलने की घटनाओं की भी खबरें सामने आईं। पूरे दिन सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें होती रहीं।
सुरक्षा बढ़ाई गई, हालात पर नजर
स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है, लेकिन फिलहाल राज्य में शांति पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है।
