नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने आज संसद में इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पेश किया, जिसमें देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति और भविष्य की दिशा का लेखा-जोखा पेश किया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में सर्वे पेश करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। सर्वे में कहा गया कि वैश्विक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग और नीतिगत स्थिरता अर्थव्यवस्था को गति देती रहेंगी।
विकास दर और GDP
सर्वे के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर लगभग 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत की आर्थिक गति एशियाई और वैश्विक औसत से बेहतर बनी हुई है।
रोजगार पर नजर
रोजगार के मोर्चे पर सर्वे ने सकारात्मक तस्वीर पेश की है। 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 56.2 करोड़ लोग कामकाजी गतिविधियों में शामिल हैं। वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी तिमाही में करीब 8.7 लाख नए रोजगार सृजित होने का अनुमान जताया गया है। सर्वे में यह भी कहा गया कि सेवा क्षेत्र, उद्योग और गिग इकोनॉमी रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वहीं, युवाओं की कौशल और उद्योग की मांग के बीच अंतर को पाटने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
महंगाई और सरकारी वित्त
महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित दायरे में रहने का अनुमान है। बेहतर कृषि उत्पादन और सप्लाई चेन सुधारों के चलते कीमतों पर दबाव सीमित रहने की उम्मीद जताई गई है। राजकोषीय घाटे में सुधार को भी प्रमुख उपलब्धि बताया गया है, जिसे आर्थिक अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
कृषि, निर्यात और विदेशी मुद्रा भंडार
कृषि क्षेत्र में स्थिर वृद्धि का अनुमान है। रिकॉर्ड फसल उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। निर्यात के मोर्चे पर, वैश्विक मंदी के बावजूद भारत का कुल निर्यात ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने का दावा किया गया है। सरकार का ध्यान पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ नए व्यापारिक साझेदारों पर है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो। विदेशी मुद्रा भंडार को पर्याप्त बनाए रखने को रुपये की स्थिरता और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता के रूप में देखा गया है।
इकोनॉमिक सर्वे को आगामी केंद्रीय बजट से पहले सरकार का रोडमैप माना जाता है। यह न केवल बीते साल की तस्वीर पेश करता है, बल्कि निवेश, रोजगार और निर्यात पर केंद्रित नीतियों के माध्यम से विकास की दिशा भी तय करता है।
