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अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की ताजा वैश्विक रिपोर्ट Employment and Social Trends 2026 दुनिया की श्रम स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक बेरोजगारी दर लगभग 4.9 प्रतिशत पर बनी रह सकती है, जिससे करीब 18.6 करोड़ लोग दुनिया भर में रोजगार से बाहर रहेंगे।
रिपोर्ट बताती है कि अगले साल रोजगार सृजन की रफ्तार और सुस्त हो सकती है। अनुमान है कि 2026 में वैश्विक रोजगार वृद्धि दर सिर्फ 1 प्रतिशत रहेगी, जो बीते दस वर्षों के औसत से नीचे है। इससे साफ है कि अर्थव्यवस्थाएं नई नौकरियां पैदा करने में जनसंख्या वृद्धि की गति से पीछे चल रही हैं।
काम मिल रहा है, लेकिन सम्मानजनक आमदनी नहीं
ILO के आकलन के मुताबिक बीते दो दशकों में रोजगार की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। आज भी दुनिया में करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो काम करने के बावजूद अत्यधिक गरीबी में जीवन गुजार रहे हैं। अनुमान है कि लगभग 30 करोड़ श्रमिक रोजाना 3 डॉलर से भी कम कमाते हैं।
कम आय वाले देशों में हालात और अधिक चिंताजनक हैं, जहां बड़ी आबादी ऐसी नौकरियों में फंसी है, जो न तो स्थिर हैं और न ही जीवन स्तर सुधारने में सक्षम।
अनौपचारिक सेक्टर का विस्तार, सुरक्षा का अभाव
रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में अनौपचारिक रोजगार एक बार फिर बढ़ रहा है।
2026 तक करीब 2.1 अरब लोग ऐसे कार्यों में लगे होंगे, जहां सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, बीमा और श्रमिक अधिकार बेहद सीमित हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक असमान और असुरक्षित बना रही है।
युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती
ILO ने युवाओं की स्थिति को “भविष्य के लिए खतरे की घंटी” बताया है।
कम आय वाले देशों में बड़ी संख्या में युवा न पढ़ाई में हैं, न नौकरी में और न ही किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े हैं। यह वर्ग लगातार बढ़ रहा है।
इसका अर्थ यह है कि 25 करोड़ से अधिक युवा ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां वे न तो कौशल अर्जित कर पा रहे हैं और न ही अनुभव। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन का बढ़ता दायरा, पहली नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए आने वाले समय में मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
महिलाएं अब भी पीछे
रिपोर्ट के मुताबिक श्रम बाजार में लैंगिक असमानता अब भी गहराई से जमी हुई है।
महिलाओं की श्रम भागीदारी की संभावना पुरुषों की तुलना में लगभग एक-चौथाई कम बनी हुई है। सामाजिक बंधन, असमान अवसर और अवैतनिक देखभाल कार्य महिलाओं को रोजगार से दूर रखे हुए हैं।
वैश्विक व्यापार और रोजगार का जटिल रिश्ता
2025 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में बदलाव और टैरिफ विवादों ने वैश्विक श्रम बाजार पर सीधा असर डाला।
2024 में दुनिया भर में करीब 46 करोड़ नौकरियां निर्यात, सेवाओं और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी थीं।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस मोर्चे पर सबसे आगे रहा, जबकि अफ्रीका और अरब देशों में व्यापार आधारित रोजगार की हिस्सेदारी बेहद सीमित रही।
एशिया-प्रशांत: अवसर भी, चुनौतियां भी
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2025 में बेरोजगारी दर घटकर लगभग 4.1 प्रतिशत रही।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब भी रोजगार का बड़ा आधार बना हुआ है, लेकिन युवाओं की बेरोजगारी चिंता का विषय है, खासतौर पर चीन जैसे देशों में, जहां शहरी युवाओं में बेरोजगारी दो अंकों में बनी हुई है।
ILO प्रमुख की दो टूक चेतावनी
ILO के महानिदेशक गिल्बर्ट हौंगबो ने कहा कि यदि सरकारें, उद्योग और श्रमिक संगठन मिलकर समावेशी नीतियां नहीं अपनाते, तो “अच्छे काम” का संकट और गहराएगा।
उनके शब्दों में,
“तकनीक का जिम्मेदार उपयोग, युवाओं के लिए कौशल विकास और महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए बिना सामाजिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।”
