Dharm Desk

हिंदू धर्म ग्रंथों में मासिक शिवरात्रि बड़ी विशेष मानी गई है. हिंदू धर्म ग्रंथों में ये दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के व्रत और पूजन से सभी तरह की इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं. इस दिन भगवान शिव के पूजन के समय मासिक शिवरात्रि की कथा भी अवश्य सुनी या पढ़ी जानी चाहिए.
हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन मासिक शिवरात्रि होती है. इस दिन भगवान शिव के पूजन और व्रत का विधान है. हिंदू धर्म शास्त्रों में ये दिन भोलेनाथ का बताया गया है. इस दिन भगवान शिव के पूरे परिवार का भी पूजन किया जाता है. इस दिन पूजन और व्रत करने वाले की सारी इच्छाओं को भगवान भोलेनाथ पूरा कर देते हैं. मासिक शिवरात्रि के व्रत कथा की भी अवश्य सुननी या पढ़नी चाहिए. बिना इसके व्रत और पूजा अधूरी मानी जाता है.
साल की आखिरी मासिक शिवरात्रि 29 दिसंबर को मनाई जाएगी. इस तिथि की शुरुआत 29 दिसंबर को तड़के तड़के 3 बजकर 32 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का 30 दिसंबर को तड़के 4 बजकर 1 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. ऐसे में 29 दिसंबर को ही मासिक शिवरात्रि रहेगी और इसका व्रत भी 29 दिसंबर को ही रखा जाएगा.
व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय एक ब्राह्मण अपनी पत्नि के साथ रहा करता था. ब्राह्मण की पत्नी बहुत पूजा-पाठ करती थी. वो हमेशा ही मासिक शिवरात्रि का व्रत किया करती थी. पत्नि को देखकर ब्राह्मण भी मासिक शिवरात्रि का व्रत करने लगा. एक बार मासिक शिवरात्रि पर खूब भक्ति भाव से दोनों पति-पत्नी ने भगवान भोलेनाथ के पूजन के साथ-साथ उनका व्रत किया और शिव जी से हमेशा कृपा बनाए रखने का आशिर्वाद मांगा. इसके बाद ब्राह्मण दंपत्ति ने गांव के पथिकों को दक्षिणा भी दी.
