नई दिल्ली।
साल 2025 के आखिरी महीने में आम लोगों की जेब पर महंगाई का दबाव फिर बढ़ता नजर आया। दिसंबर 2025 में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो बीते तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। नवंबर में यह दर 0.71 प्रतिशत थी, यानी एक ही महीने में इसमें लगभग दोगुना उछाल दर्ज किया गया।

आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले सितंबर में खुदरा महंगाई 1.44 प्रतिशत पर रही थी। दिसंबर में आए इस इजाफे के पीछे सबसे बड़ा कारण सब्जियों और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी मानी जा रही है।
खाद्य महंगाई अब भी माइनस में, लेकिन राहत घट रही
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति लगातार सातवें महीने भी नकारात्मक दायरे में रही। दिसंबर में खाद्य महंगाई -2.71 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि नवंबर में यह -3.91 प्रतिशत थी।
हालांकि आंकड़े अब भी माइनस में हैं, लेकिन गिरावट की रफ्तार धीमी होना यह संकेत दे रहा है कि आने वाले महीनों में खाद्य कीमतें धीरे-धीरे ऊपर जा सकती हैं।
किन चीजों से बढ़ी महंगाई?
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, दिसंबर में महंगाई बढ़ने के पीछे कई श्रेणियों में दाम बढ़ना जिम्मेदार रहा, जिनमें प्रमुख हैं—
- सब्जियां और मसाले
- मांस, मछली और अंडे
- दालें और उनसे जुड़े उत्पाद
- पर्सनल केयर और घरेलू उपयोग की वस्तुएं
इन सभी ने मिलकर खुदरा महंगाई दर को ऊपर की ओर धकेला।
RBI की नीति के लिहाज से क्या संकेत?
दिसंबर में महंगाई बढ़ने के बावजूद यह आंकड़ा लगातार चौथे महीने आरबीआई की निचली सहनशीलता सीमा (2%) से नीचे बना हुआ है।
सरकार ने रिजर्व बैंक को महंगाई 4 प्रतिशत के आसपास रखने का लक्ष्य दिया है, जिसमें 2 से 6 प्रतिशत की सीमा तय है। मौजूदा 1.33 प्रतिशत की दर यह दिखाती है कि अर्थव्यवस्था में कीमतों का दबाव अभी भी सीमित है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के पास विकास को प्राथमिकता देने की गुंजाइश बनी हुई है।
दिसंबर के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई तीन महीने के उच्च स्तर पर जरूर पहुंची है, लेकिन फिलहाल यह नियंत्रण में है। खाद्य महंगाई का लगातार नकारात्मक रहना इस ओर इशारा करता है कि ग्रामीण मांग और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में अभी पूरी मजबूती नहीं आई है।
इसका मतलब यह भी है कि आम उपभोक्ताओं पर फिलहाल बहुत ज्यादा महंगाई का बोझ नहीं पड़ा है, हालांकि रसोई का बजट आने वाले समय में प्रभावित हो सकता है।
