February 6, 2026

बिजनेस

वैश्विक हालात ने बुलियन बाजार की तस्वीर ही बदल दी है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही सोना और चांदी ऐसी तेजी में हैं, जिसे बाजार के जानकार “असाधारण दौर” बता रहे हैं। जनवरी महीने में सोने की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की छलांग दर्ज की गई है—यह प्रदर्शन 1973 के बाद पहली बार देखने को मिला है।

चांदी ने भी निवेशकों और खरीदारों, दोनों को चौंका दिया है। घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी का भाव 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल चुका है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 120 डॉलर प्रति औंस की ऐतिहासिक ऊंचाई छू चुकी है।

बाजार में क्यों मची है अफरा-तफरी?

विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा तेजी केवल कारोबारी आंकड़ों का नतीजा नहीं है। इसकी जड़ में दुनिया भर में बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे वे जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

सोना और चांदी परंपरागत रूप से ऐसे दौर में सबसे भरोसेमंद विकल्प माने जाते हैं, और यही वजह है कि इनकी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

फेड का रुख और निवेशकों का झुकाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में फिलहाल कोई कट न करने से डॉलर पर दबाव बना हुआ है। इसका सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिल रहा है।
इसी का असर है कि दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड ईटीएफ की होल्डिंग्स कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। बड़े निवेशक और संस्थाएं अब अपने पोर्टफोलियो में फिजिकल गोल्ड और सिल्वर का हिस्सा बढ़ा रही हैं।

घरेलू बाजार में भी रिकॉर्ड टूटे

दिल्ली समेत देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में सोना 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर बना हुआ है। लगातार कई कारोबारी सत्रों से कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है, जिससे आम खरीदार के लिए जेवर खरीदना महंगा होता जा रहा है।

2027 तक कहां जा सकता है भाव?

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगर जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक आर्थिक दबाव ऐसे ही जारी रहे, तो 2027 तक सोने की कीमत 8,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
इसी अवधि में चांदी भी नए ऐतिहासिक स्तर बना सकती है और निवेशकों को मजबूत रिटर्न दे सकती है।

आम आदमी बनाम निवेशक

जहां एक ओर निवेशकों के लिए यह दौर मुनाफे का अवसर बन रहा है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ता और शादी-ब्याह की तैयारी करने वालों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कीमती धातुएं और भी महंगी हो सकती हैं।

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